May 19, 2024 9:05 am
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,,,,,, कहानी पागलपन ,,,,,,,,,,,,,,,

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,,,,,,,,,,, कहानी पागलपन ,,,,,,,,,,,,,,,

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,,,,,,,,,,,, पागलपन,,,,,,,,,,,,

 

दक्षिण प्रदेश के छोटे से गांव ,वारसी, में आज बहुत ही ज्यादा उल्लास मय दिन न बनता जा रहा था चारों तरफ एक ही चर्चा थी महान संत पंढरपुर सी अपने यहां पर पधारे है गीता पर प्रवचन करने के लिए
, प्रवचन श्रवण करने के लिए जनता की भी उमड़नी प्रारंभ हो जाती है वैठ़ने के लिए जो पंडाल बनाया गया था लगभग पूरा भर चुका था

,, फिर भी लोगों का आवागमन बना हुआ एक महिला जिसके गर्भ में आज ही पश्चिम रात्रि के समय कोई जीव का आगमन होता है वह महिला प्रवचन श्रवण करने के लिए बैठ जाती है

, गीता पर प्रवचन चल रहा था एक एक श्लोक साथ में उसका अर्थ भी किया जा रहा था महिला प्रवचन श्रवण करने में इतनी ज्यादा तल्लीन बन जाती है भाव विभोर भी बननी प्रारंभ हो जाती है

, वह महिला ही प्रवचन नहीं सुन रही थी उसके गर्भ में जो जीव आया था वह भी प्रवचन श्रवण कर रहा था मां की एकाग्रता जितनी बढ़ती है उतनी ही एकाग्रता उस जीव की भी बढ़ती जा रही थी

, गर्भ में जो बालक है वह कथा वाचक की हर श्लोक उसके अर्थ को भी सुनता जा रहा था और अपने स्मृति केंद्र में स्थापित करता जा रहा था
, नो महीनों के पश्चात वह बालक अपनी माता के गर्भ से बाहर आता है आंखें खोलता है पर दूसरी क्षण आंख को बंद कर देता है बाहर के दृश्य उसको अच्छे नहीं लग रहे थे अपने भीतर के दृश्य उसको अच्छे लग रहे थे गीता का एक-एक श्लोक वह दोहराता जा रहा था अर्थ सहित
, बालक जब 3 बर्ष का होता है फिर उसी स्थान पर कथा का आयोजन रखा जाता है पंडित गीता के श्लोक का उच्चारण करता है वह कुछ अशुद्ध बोला था
, तीन वर्षीय बालक परमानंद अपने आप को रोक नहीं पाता है परिषद में खडा हो जाता है पंडित जी आप गलत गीता का श्लोक क्यों बोल रहे हैं बालकनी अपनी बात को कुछ ऊंची आवाज में प्रस्तुत की
, सभी लोगों का ध्यान उस बालक पर केंद्रित हो जाता है पंडित जी के अहंकार पर चोट लगती है तत्काल पंडीत जी ने कहा अरे बालक तू क्या समझता है गीता जी के बारे में जो इस तरह से बोल रहा है मैंने कौन सा श्लोक गलत बोला है पंडित जी ने आंखें तरेरते हुए कहा

, तथाकथित अंधभक्त लोग भी पंडित जी का समर्थन करना प्रारंभ कर देते हैं यह छोटा बालक क्या जानता है गीता को इस तरह की आवाज चारों तरफ गुंजायमान होनी प्रारंभ हो जाती है

, माता का ध्यान अपने पुत्र पर केंद्रित होता है वह भी आश्चर्य के साथ अपने पुत्र को निहार ना प्रारंभ कर देती है पुत्र अपनी माता को आवश्यकता है घबराने की जरूरत नहीं है
, बालक ने अपनी शक्ति को बटोरते हुए कहा पंडित जी आपने एक गलती नहीं 11 वार गलती की है फिर सभा का ध्यान न बालक पर केंद्रित होना प्रारंभ हो जाता है
,बालक ने गीता के प्रथम श्लोक को स स्वर संगान प्रारंभ किया जनता का ध्यान बालक पर ओर ज्यादा केंद्रित हो जाता है बालक के उच्चारण को सुनकर लोग मंत्र मुग्ध बन जाते है

, गीता के 700 सो श्लोक क्रमबद्ध बोलना प्रारंभ कर देता है दो घंटे तक समा बंध जाता है जनता का ध्यान जब बालक पर केंद्रित होता है पंडित जी वहां से पलायन करने में ही अपनी खैरियत समझना मानना प्रारंभ कर देती है तत्काल वहा से रवाना हो जाते हैं

, जनता ने बालक को अपने हाथों में उठाकर व्यास पीठ पर विराजमान करवा दिया आज गीता सुनने का आनंद जनता को जो आता है वैसा आनंद आज तक उनको नहीं आया था

, गीता पाठ पूरा होता है बालक दौड़कर अपनी माता की गोद में आ कर वेठ़ जाता है माता का आशीर्वाद रुपी हाथ बालक के मस्त पर केंद्रित हो जाता है बालक के इस ज्ञान को देखकर जनता उसकी चरण छूना प्रारंभ कर देती है
, बेटा यह गीता तुमने कब याद की मेरे को तो पता ही नहीं मां ने पूछा जनता का ध्यान बालक पर केंद्रित होता है बालक क्या उत्तर देता है यह सब के मर में प्रश्न था

, जगन्नाथ ने कहा मातोश्री 3 बर्ष पूर्व इसी स्थान पर पंढरपुर से आए हुए भक्त ने गीता पढ़ी थी उस समय मैं तेरे गर्भ में था तुमने एकाग्रता के साथ श्रवण किया उसी समय मेरे को गीता याद हो गई थी लोग आश्चर्य भरी नजरों के साथ बालक जगन्नाथ को निहारना प्रारंभ कर देते हैं

, बालक प्रति दिन गीता जी का पाठ करना आरंभ कर देता है मन में अनाशक्ति की भावना जागृत होनी प्रारंभ हो जाती है
, कुछ समय के पश्चात अपनी माता की आज्ञा से परमानंद देखते देखते पंढरपुर की ओर अपने कदमों को गतिशील बनाना काम कर देते हैं
, वहा पर पहुंचने के पश्चात अपने आप को भक्ति में लवलीन बनाना कर देते हैं अपने आराध्य के मंदिर में प्रातःकाल पहुंच कर अपने आप को प्रभु भक्ति में समर्पित कर देते हैं
, शरीर पर फटे पुराने जेसे वस्त्र होते थे उसी अवस्था में पहुंच जाते थे सर्दियों गर्मी हो बरसात हो कि चढ़ाओ इसका कोई ध्यान नहीं रखते थे वहां पहुंचकर गीत के एक श्लोका उच्चारण करते दंडवत प्रणत मुद्रा में अपने आप को अवस्थित बनाना प्रारंभ कर देती थे गीता के 700 सो श्लोकों का विधिवत उच्चारण करके दंडवत प्रणाम करते यह दृश्य देखकर आने वाले भक्त लोग आश्चर्य चकित रह जाती थे भिक्षा में लुखा सुखा ठंडा गरम जो भी पदार्थ मिलता सेवन करके साधना में लग जाते
, एक दिन बहुत बड़ा भक्त वहां पर उपस्थित होता है जिसके हाथ में पीतांबर रेशमी वस्त्र थें निवेदन करता है आपके शरीर पर फटे पुराने वस्त्र शोभा नहीं देते रेशमी वस्त्र धारण करवाएं परमानंद ने हाथ जोड़ते हुए का वस्त्र का क्या धारण करना जो है वह अच्छे है बहुत ही ज्यादा आग्रह के बाद रेशमी वस्त्र स्वीकार करते हैं

, दूसरे दिन एक भक्त और आता है जिसके हाथों में छप्पन भोग थे उसको ग्रहण करने का निवेदन करता है बहुत ज्यादा आग्रह के बाद मिष्ठान पकवान स्वीकार करते हैं
, नयें रेशमी वस्त्र मिष्ठान पकवान ग्रहण करने के पश्चात मन की भावनाओं में परिवर्तन आना प्रारंभ हो जाता है प्रभु के मंदिर में पहुंचता है बरसात का दौर चल रहा था कीचड़ इकट्ठा हो जाता है रेशमी वस्त्र खराब नहीं हो जाए इसलिए उनको खोलकर एक तरफ रखा देता
, गरिष्ठ भोजन नए वस्त्रों के प्रति ममत्व भाव जागृत होने से आज उनका ध्यान प्रभु भक्ति में नहीं गीता के श्लोक ऊपर नहीं वस्त्र पर अटक जाता है मन में बैचेनी का दौर पर हो जाता है
, भीतर से आवाज आती है जब तेरे को अच्छा भोजन करना था अच्छे वस्त्र पहनने थे फिर यहां पर क्यों आया है उसी समय बमन होता है उल्टी के साथ छप्पन भोग पकवान वाहर आ जाते है रेशमी वस्त्रों के प्रति आकर्षण समाप्त हो जाता है
, रेशमी वस्त्रों के टुकडे टुकडे करके कीचड़ में डाल देते हैं पुराने फटे कपड़े धारण करके भक्ति में अपने आप को समर्पित कर देते हैं गीता का श्लोक बोलते जाते है अनाशक्ति के भाव जारी धोनी प्रारंभ हो जाते हैं साधना साकार रूप ग्रहण कर लेती है चारों तरफ जय-जयकार के शंखनाद होने प्रारंभ खो जाते हैं

, लोगों के लिए यह पागलपन आस्था का केंद्र बिंदु वन जाता है
, पागलपन?

,, पागलपन, पागलपन,??

,,, पागलपन, पागलपन,, पागलपन,,,??????????
*यह रचना मेरी नहीं है। मुझे अच्छी लगी तो आपके साथ शेयर करने का मन हुआ।🌷*

गिरीश
Author: गिरीश

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