May 19, 2024 8:58 am
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*💐 समाधान वृक्ष:- ठाकुर जी 💐*

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      *💐 समाधान वृक्ष:- ठाकुर जी 💐*

सरला नाम की एक महिला थी। रोज वह और उसके पति सुबह ही काम पर निकल जाते थे। दिन भर पति ऑफिस में अपना टारगेट पूरा करने की ‘डेडलाइन’ से जूझते हुए साथियों की होड़ का सामना करता था। बॉस से कभी प्रशंसा तो मिली नहीं और तीखी-कटीली आलोचना चुपचाप सहता रहता था।

पत्नी सरला भी एक प्राइवेट  कम्पनी में जॉब करती थी। वह अपने ऑफिस में दिनभर परेशान रहती थी। ऐसी ही परेशानियों से जूझकर सरला लौटती खाना बनाती, शाम को घर में प्रवेश करते ही पति और बच्चों की अलग-अलग फरमाइशें पूरी करते-करते बदहवास और चिड़चिड़ी हो जाती है। घर और बाहर के सारे काम उसी की जिम्मेदारी हैं।

थक-हार कर वह अपने जीवन से निराश होने लगती है। उधर पति दिन पर दिन हर छोटी बातों पर बुरा मानने वाला होता जा रहा है। बच्चे विद्रोही हो चले हैं।

एक दिन सरला के घर का नल खराब हो जाता है। उसने प्लम्बर को नल ठीक करने के लिए बुलाया। प्लम्बर ने आने में देर कर दी। पूछने पर उसने बताया कि साइकिल में पंक्चर के कारण देर हो गई। घर से लाया खाना मिट्टी में गिर गया, ड्रिल मशीन खराब हो गई, जेब से पर्स गिर गया…। इन सब का बोझ लिए वह नल ठीक करता रहा।
इतने शांत मन से प्लम्बर को नल ठीक करते देख सरला बहुत हैरान होती है।

काम पूरा होने पर महिला को उस पर दया आ गई और वह उसे गाड़ी में उसके घर छोड़ने चली गई।

प्लंबर ने उसे बहुत आदर से चाय पीने का आग्रह किया। प्लम्बर के घर में प्रवेश करते ही उसका चेहरा खिल उठा।
प्लम्बर ने अपने छोटे दोनों बच्चों को प्यार किया, मुस्कराती पत्नी को स्नेह भरी दृष्टि से देखा और चाय बनाने के लिए कहा।

सरला यह देखकर हैरान थी। बाहर आकर पूछने पर प्लंबर ने बताया –  जिम्मेवारिया और समस्याएं तो जीवन भर समाप्त नहीं होंगी। मेरे ठाकुर जी मेरी बहुत मदद करते हैं जिनके कहे हुए वाक्य मैं सदैव याद रखता हूँ कि ,”जो बीत गया अच्छा, जो होगा अच्छा और जो चल रहा है वो और भी अच्छा। यह मेरी परेशानियाँ दूर कर देता है। मैं सारी समस्याओं का बोझ अपने ठाकुर जी को दे कर चैन की नींद से सो जाता हूं और घर में कदम रखने से पहले अपने ठाकुर जी को साथ लेकर जाता हूँ। चिंताओं को अंदर नहीं ले जाता। सुबह जब थैला उतारता हूं तो वह पिछले दिन से कहीं हलका होता है। काम पर कई परेशानियाँ आती हैं, पर एक बात पक्की है- मेरी पत्नी और बच्चे उनसे अलग ही रहें, यह मेरी कोशिश रहती है। इसीलिए इन समस्याओं को बाहर छोड़ कर आता हूं। प्रार्थना करता हूँ कि है भगवान मेरी मुश्किलें आसान कर दें। मेरे बच्चे मुझे बहुत प्यार करते हैं, पत्नी मुझे बहुत स्नेह देती है, तो भला मैं उन्हें परेशानियों में क्यों रखूँ।

सरला मन ही मन सोचती है कि हमसे साहूकार तो यह प्लम्बर है।हमारे पास सब कुछ होते हुए भी प्रेम,सुख वे शान्ति की कमी महसूस होती है।

*💐 शिक्षा 💐*
यह घर-घर की हकीकत है। गृहस्थ, एक तपोभूमि है। सहनशीलता और संयम खोकर कोई भी इसमें सुखी नहीं रह सकता। जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं, हमारी समस्याएं भी नही।पल का भरोसा नहीं, विचार करें कि वर्तमान का सुख कैसे ले सकते हैं।                        *यह रचना मेरी नहीं है। मुझे अच्छी लगी तो आपके साथ शेयर करने का मन हुआ।🌷*

गिरीश
Author: गिरीश

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